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December 12, 2018
 

WE SHOULDN'T GET DISTURBED, WE GET WHAT WE DESERVE. NOTHING MORE OR NOTHING LESS. WHETHER WE ACCEPT OR NOT, IT'S THERE. WE HAVE TO ENDURE IT.

- Sanjay Udgirkar.

DAY OF THE DEAD
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December 10, 2018
 

गुंजाइश ।

पीछे बुराई करने वाले ।
मेरे नुकसान के लिये दुआ करने वाले ।
मुझसे जलने वाले ।
मुझसे सिर्फ नाम की दोस्ती करने वाले ।

ऐसे कई प्यारे दोस्त है मेरे ।
जिंदगी की जिद्दो जहद मे यही मिले है सारे ।
दिनरात मुझे पानी मे देखते है ये यार मेरे ।
बडे अच्छे किरदार वाले है यार मेरे ।

बडे प्यार से जख्म पे नमक छिड़कते है दोस्त मेरे ।
दोहरे मतलब की बात करके जख्म गहरा करते है यार मेरे ।
बडे भोले और मासूम है देखने मे सारे ।
छाती पे हात रखके दोस्ती का दम भी भरते है सारे ।

दिनरात ये दोस्त मसरूफ रखते है मुझे ।
नये दोस्त बनाने का मौका कंहा देते है मुझे ।
दुश्मनों की कमी बिलकुल महसूस नही होने देते है मुझे ।
दिलो जान से चाहते है मुझे ।

अब नये दोस्त बनाने की हिम्मत और गुंजाइश नही ।
ताजे घावों के लिए अब दिल ...

I NEED A DRINK
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December 5, 2018
 

इतनी सी बात थी ।

दिल को बहलाने की बात थी ।
मालूम होते हुए भी अनजान होने की बात थी ।
बस झूठ को सच मानने की बात थी ।
होते हुए भी पहचान छुपाने की बात थी ।

- संजय उदगीरकर ।

POPULATED AREAS
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December 5, 2018
 

मुश्किल ।
हमसे चेहरा छुपाना था ।
धुप का तो सिर्फ बहाना था ।
रूबरू होने से डर जो था ।
अभी रास्ता बदलना भी मुश्किल था ।

- संजय उदगीरकर ।

SUNNY SHADES
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December 5, 2018
 

खरोंच ।

दिल के खरोंचो पे मरहम लगा रहा था ।

जख्म पे थंडी हवा फूंक रहा था ।

पुरानी यादों पे नई यादें चिपका रहा था ।

वो मुझे माजी से बाहर निकाल रहा था ।

- संजय उदगीरकर ।

BE BRAVE
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December 5, 2018
 

मान भी लो ।
कभी किसी को अपना मान भी लो ।
दो मीठे बोल, बोल भी लो ।
किसी गिरते को कभी थाम भी लो ।
वक़्त सब पे आता है ये जान भी लो ।

- संजय उदगीरकर ।

POPULATED AREAS
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December 9, 2018
 

घडा ।

घडा दिखता नही, पर भरता रहता है।

अपने कर्म का फल दिखे या ना दिखे

अपने हिसाब मे जुडता रहता है ।

तुम मानो या न मानो ये सब होता रहता है ।

- संजय उदगीरकर ।

GOLDFISH LOVE
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December 9, 2018
 

कशिश ।

क्या कशिश थी उस शख्स मे क्या पता ।
जब जी चाहे आवाज देके बुलाता ।
नज़र से ही हाले दिल बंया करता ।
जो भी बात करता, उसपे सोंचने को मजबूर करता ।

क्या कशिश थी उस शख्स मे क्या पता ।
जब भी मिलता दिल-ओ-दिमाग को जब्त करता ।
घंटो सिर्फ उसकी बातोंको सुनने को मन करता ।
कंहा से आये और कंहा जाना है ये भी भुला देता ।

क्या कशिश थी उस शख्स मे क्या पता ।
बहोत थोडेसे गुजर बसर करता ।
झूठ, फरेबसे सख्त परहेज करता ।
छोटी छोटी खुशीयों मे बहोत खुश रहता ।

क्या कशिश थी उस शख्स मे क्या पता ।
जो भी कहता वो सच लगता ।
कुछ न कर सका तो कम-से-कम हाथ थामता ।
बातों से दिल के घावों पे मरहम करता ।

क्या कशिश थी उस शख्स मे क्या पता ।
मुस्कुराके दूरियों को दुर करता ।
दिलसे हसता और हसाता ।
वो मेरा कुछ न था पर मुझे अपनासा ...

ORIGINS
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December 8, 2018
 

सिर्फ वो ।

मासूम सी मुस्कान वो ।
सूरज की तपिश वो ।
चांद की मनमोहक रोशनाई वो ।
फूलों के खुशबूकी महक वो ।
नर्म हरी घांसकी हरियाली वो।
बरसात मे सूरज की रोशनी मे दिखनेवाली धनक वो।
मेरे दिल मे धडकनेवाली धडकन वो ।
उस के जैसी सिर्फ वो ।

कोयल की कूक वो ।
मोरनी का खुला हुआ पंख वो ।
घने काले बादल मे चमकती हुई बिजली वो ।
दोपहर की कडक धुप मे पीपल की छाया वो ।
प्यासे के लिए मटके का शीतल जल वो ।
भुके के लिए रोटी प्याज वो ।
गरमा के मौसम मे रात मे चलने वाली थंडी थंडी हवा वो ।
उस के जैसी सिर्फ वो ।

- संजय उदगीरकर ।

BE BRAVE
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December 8, 2018
 

शौर्य ।

शिकस्त से मै डरता नही ।
दुश्मन मेरे सामने टिकता ही नही ।
मौत मुझसे डरती है ।
क्यूँ की मै मौत से डरता नही ।

हिम्मत बुलंद है ।
आसमान छूती है ।
मुसीबते मुझसे डरती है ।
हमेशा मुझसे हारती जो है ।

पस्त वो होते है जो हार मानते है ।
हम तो हार को भी हराने वाले है ।
हम ऐसे जियाले है ।
हमसे हमारे दुश्मन के मरे हुए रिश्तेदर भी डरते है ।

हिंदुस्तान के हर फौजी की यह कहानी है ।
देशभक्ति की हिंदुस्तान की फौज दिवानी है ।
उनके खुन का हर कतरा देश की रक्षा की जामिन है ।
हिंदुस्तान के फौज का हर जवान एक शौर्य की कहानी है ।

- संजय उदगीरकर ।

DEMOCRACY
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December 8, 2018
 

READING.

Learned to read between lines.
Learned to see the hidden lies.
Faces which show false smiles.
They play with truth like toys.

Hate is hidden just under false love.
Are afraid but pose is of brave.
Try to look and appear like a naive.
Though they like only lie.

- Sanjay Udgirkar.

BE BRAVE
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December 8, 2018
 

WIFE.

May be you are right.

We could have patched up.
It was just nothing.
But we blew it and made a big issue of a non issue.

May be you are right.

I know it was my ego.
You know you were also stubborn.
We never allowed it to cool down.
Eagerly we jumped to impromptu judgement.

May be you are right.

We could have solved it by remaining silent.
We were eager to prove our point.
We could not listen to each other due to our own shouting.
We proved ourselves immature.

May be you are right.

I accept it was my mistake, I started it.
I was male chavounist.
I should have said sorry.
Is there any chance now.

May be you are right.

You know how I feel about you.
I am sure you might also be e...

LAST HUG
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December 6, 2018
 

MATURITY.

When you gain maturity.
You loose stupidity.
Beauty of the maturity.
Maturity brings thought clarity.
Maturity brings behavioural simplicity.
Maturity brings attitudal magnanimity.
Maturity dissolves mental negativity.
Maturity cultivates positivity.
Maturity inculcates natural sincerity.
Maturity sharpens human sensitivity.
Maturity increases human relativity.
Maturity increases status in society.
Maturity brings ability to appriciate beauty.
Maturity brings serenity.
Maturity increases bearability.
Maturity brings reasoning capacity.

- Sanjay Udgirkar.

GAMES AND DRINKS
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December 6, 2018
 

Life is the rarest of the rare gift.
We do nothing to deserve or to just receive it.
Do we have right to spoil it.
We can only appriciate, enhance, enjoy and relish it.
As received we too can pass it.
We can express gratitude by valuing it.
Must be lived in full, have no right to terminate it.
It is his prerogative to terminate it.
There should not be any regrets when we leave it.
When we enjoy life then we live it.

- Sanjay Udgirkar.

PORTRAIT
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December 6, 2018
 

You never get what you want.
You have to do with whatever he grant.

Life is full of surprises.
Inspite of that it deserves praises.

Never complain about whatever you have.
There are so many, who don't have.

Still there is so much you can achieve.
You won't get it if you only grieve.

You only get whatever you want if you deserve.
Make your self eligible to deserve.

Hardwork cannot be substituted.
Likewise merit cannot be duplicated.

Just dreaming big won't help you.
Dreaming is to be supported with hardwork due.

Don't accept anything in lieu.
Destiny will not give you any clue.

- Sanjay Udgirkar.

HAPPY MIND, HAPPY LIFE
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December 4, 2018
 

बल बूते ।

डर का डर लगता है ।

वैसे डर मे डरने जैसा कुछ नही होता है ।

डर भी किसी के सहारे से डराता है ।

डर अपने बल बूते पे कंहा डरा सकता है ।

- संजय उदगीरकर ।

OMG!
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November 29, 2018
 

दरारें ।

दरारें भर रहा हूँ ।

कुछ यादों को दफन कर रहा हूँ ।

खता किये बगैर माफी मांग रहा हूँ ।

कुछ ख्वाबों को टूटने से बचा रहा हूँ ।

- संजय उदगीरकर ।

CREATIVE ILLUSION
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November 30, 2018
 

दुनिया ।

तेरी दुनिया सिर्फ दुर से खुबसूरत दिखती है ।

शायद इसलिए तु भी इसे आसमान से चलाता है ।

जमीन पे तो तु सिर्फ किताबें ही भेजाता है ।

तेरी उन किताबों मे कौन यकीन करता है।

- संजय उदगीरकर ।

AAKASH PANDEY
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December 1, 2018
 

बस ।

बहोत अरसे बाद मिला है ।

बोलना तो चाहता है पर गुमसुम खडा है ।

पहचानता है फिर भी अनजान खडा है ।

जानता है इसलिए देखते ही मुडा है ।

- संजय उदगीरकर ।

CALVIN & HOBS
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December 1, 2018
 

चलो ।

चलो कुछ जी लेते है
फटे ख्वाबों को सी लेते है ।
आंसुओं को पोंछ लेते है ।

मालूम है ।
मंजिल बहोत दूर है ।
चलो मंजिल की और चलते है ।

जमीन को मौसम मिलते रहेंगे ।
और जिंदगी के लिए हम तरसते रहेंगे ।
मौत का खौफ दिल से कब निकालेंगे ।

- संजय उदगीरकर ।

LIFE IS GREAT
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December 4, 2018
 

छिलका ।

सिर्फ छिलका निकला ।

दोस्त भी कुछ ऐसा ही निकला ।

उपर से भरा भरा और अंदर से खोखला निकला ।

दोस्त असल मे द्वेष करने वाला निकला।

- संजय उदगीरकर ।

BE BRAVE
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December 1, 2018
 

दुर ।

दुर है पर दिल से गया नही ।

यादों के गुच्छे दिल से गिरते नही ।

उसके ना होते हुए भी मै तनहा नही ।

यादों के गुच्छे कभी सुखते नही ।

- संजय उदगीरकर ।

MY SOUL CRIES OUT FOR YOU
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December 5, 2018
 

विचार.

जेंव्हा आपण आपल्या यशाची तुलना दुसर्यांच्या यशाशी करतो त्या क्षणी आपण आपल्या यशातला आनंद गमावून बसतो व कष्टाने प्राप्त झालेल्या आनंदाला आपण आपल्या मूर्खपणा मुळे दुःखात परिवर्तित करतो.

- संजय उदगीरकर.

RECOLLECTION
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November 29, 2018
 

एकांत.

आता कोणी विचारत नाही.
आमच्या कडे कोणी येत जात नाही.
फोनची घंटी पण पहिल्या सारखी वाजत नाही.
दारावरची बेल पण खणखणत नाही.

दिवसरात्र निशब्द शांतता नांदत असते.
मनातल्या मनात बोललेलं मोठ्याने ऐकू येते.
आजकाल घर एकदम शांत शांत असते.
आठवणींचीच घरात वर्दळ असते.

भिंती सुद्धा आता अबोल झाल्या आहेत.
वाळलेल्या झाडा सारख्या उभ्या आहेत.
चित्र टांगलेली असूनही बोडक्या वाटत आहेत.
भिंती वरचे गडद रंग आता फिकट वाटत आहेत.

दिवस खूप हळू हळू पुढे सरकत आहे.
रात्र घालवणे दिवस घालवण्यापेक्षा अवघड आहे.
उश्याला दुःखद आठवणींचे कोंडाळे आहे.
त्यांची डोक्यात भुणभुण चालू आहे.

जीवनाची संध्याकाळ आहे.
सर्व काही शांत, संथ व निवांत आहे.
हवा हवा होता आणी आता नको असलेला एकांत आहे.
जसा तेज, ताप हीन मावळता सु...

DARK NIGHT
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November 29, 2018
 

डोळे.

डोळे सुद्धा बोलतात.
मनातले भाव प्रकट करतात.
खर्याचं खोटं आणी खोट्याचं खरं करतात.
स्वभावाच्या आरश्याचे काम करतात.

डोळे धुर्त सुद्धा असतात.
आवश्यक असेल तेंव्हा निर्विकार असतात.
हवे तेंव्हा दगडा सारखे होतात.
गैरसमजही लीलया पसरवतात.

डोळे भोळे सुद्धा असतात.
निष्पाप व निरागस पण असतात.
मनातले लपवण्यात असमर्थ असतात.
सत्यात ओथंबलेले असतात.

डोळे शब्दांच्या पलीकडचे बोलतात.
शब्द संपले की बोलायला डोळे लागतात.
डोळे जसे बाहेरचे पाहतात.
तसेच मनातले सुद्धा ओळखतात.

डोळे डोळ्यांशी बोलण्यात गुंततात.
डोळे डोळ्यांचे भाव अचुक टिपतात.
अश्रू द्वारे आपले भाव प्रकट करतात.
डोळे माणसाच्या मनातले सहज ओळखतात.

- संजय उदगीरकर.

RESPECT
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November 29, 2018
 

कुर्यात सदा मंगलम्.

सप्तपदी.

आज मी तुला वचन देतो. - नवर्याचे पहिले पाऊल.
मी माझे मीपण सोडून देतो.
तुझ्या ताटा खालचे मांजर होतो.
ईथून मी तुला भिऊन राहतो.

आज मी तुला वचन देतो. - नवर्याचे दुसरे पाऊल.
तुझा आज्ञाधारक नवरा होतो.
बाहेरच्या पेक्षा घरात जास्त काम करतो.
हळूहळू मी घरातील सर्व कामे शिकुन घेतो.

आज मी तुला वचन देतो. - नवर्याचे तिसरे पाऊल.
सप्तपदांची तुला मी सात वचने देतो.
तुझ्यासाठी मी काहीही करतो.
दारू, मांसाहार, जुगार, सिगारेट, विडी, तंबाखू आणी तमाशा ह्यांचा मी याक्षणी त्याग करतो.

आज मी तुला वचन देतो. - नवर्याचे चौथे पाऊल.
तुझ्या शिवाय मी इतर सर्व स्त्रियांना आई व बहीण मानतो.
गळ्यात सदैव तुझ्या नावाचा काल्पनिक पट्टा वागवतो.
तुझ्या साठी मी माझ्या मित्रांना सुद्धा माझ्या पा...

INDUS
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November 28, 2018
 

चिराग ।

बुझा हुआ चिराग हूँ ।

सिर्फ बचा हुआ धुआं हूँ ।

अब मै किस काम का हूँ ।

फिर से जलने के इंतज़ार मे हूँ ।

- संजय उदगीरकर ।

OLDEST
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November 28, 2018
 

हवाओं मे ।

हवाओं के काबू मे हूँ ।

आसमान तो कभी खाक मे हूँ ।

मै अब मै कंहा हूँ ।

कभी माझी तो कभी मुस्तकबिल हूँ ।

- संजय उदगीरकर ।

ENJOY THE LITTLE THINGS IN LIFE
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November 28, 2018
 

सिला ।

मेरी आंखों से आंखें तो मिला ।

बता तो क्या है मुझसे गिला ।

बीच राह में क्यों हाथ छोड के चला ।

वफ़ा का बेवफाई से दे रहा है सिला ।

- संजय उदगीरकर ।

RECOLLECTION
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November 28, 2018
 

तार तार ।

हवाएं उडा के ले जा रही है ।

मुझे हरसू बिखेर रही है ।

जिंदगी तार तार हो रही है ।

गलती की इतनी बडी सजा दे रही है ।

- संजय उदगीरकर ।

RESPECT
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